पुखराज रत्न (Yellow Sapphire) वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह का प्रमुख रत्न माना जाता है। यह ज्ञान, धन, विवाह, संतान सुख, करियर और भाग्य को मजबूत करने वाला अत्यंत शुभ रत्न माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर हो, तो पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है।
यदि आप जानना चाहते हैं कि पुखराज धारण विधि क्या है, पुखराज किस दिन पहनना चाहिए और इसका मंत्र क्या है, तो यहां आपको पूरी जानकारी मिलेगी।
पुखराज रत्न को धारण करने के लिए सबसे शुभ दिन गुरुवार माना जाता है क्योंकि गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को समर्पित होता है।
पुखराज रत्न को प्रातःकाल:
धारण करना शुभ माना जाता है।
पुखराज धारण करने से पहले उसकी शुद्धि और पूजा करना आवश्यक माना जाता है।
सबसे पहले पुखराज को सोने की अंगूठी में जड़वाएं।
एक कटोरी में निम्न चीजें रखें:
पुखराज रत्न को इस मिश्रण में 15 से 20 मिनट तक रखें।
भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करें।
पुखराज मंत्र का जाप करें।
ॐ बृं बृहस्पतये नमः ext{ॐ बृं बृहस्पतये नमः}ॐ बृं बृहस्पतये नमः
इस मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।
मंत्र जाप के बाद पुखराज को दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली (Index Finger) में धारण करें।
पुखराज रत्न को दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली में पहनना सबसे शुभ माना जाता है।
पुखराज रत्न धारण करने से:
पुखराज रत्न विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है:
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पुखराज रत्न बृहस्पति ग्रह का अत्यंत शुभ रत्न माना जाता है। सही विधि, मंत्र और शुभ समय के साथ पुखराज धारण करने से जीवन में धन, विवाह, करियर और भाग्य से जुड़े सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। गुरुवार के दिन विधिपूर्वक पुखराज धारण करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
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